राजीब कुमार सिंघी
असम में अगले साल अप्रैल में चुनाव होने हैं।इसके पहले मुख्यमंत्री डा.हिमंत विश्व शर्मा धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण करने में लगे हैं।अकेले वे नहीं,उनके मंत्री भी इस काम में लगे हैं।संविधान के नाम पर शपथ लेकर वे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। संविधान का माखौल उड़ाया जा रहा है।हिंदुओं के मन में डर पैदा किया जा रहा है।
पहले मेघालय के एक निजी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा.महबूबल हक,जो असम के ही हैं, के खिलाफ मुहिम छेड़ी।उन्हें गुवाहाटी में आनेवाली बाढ़ के लिए जिम्मेवार ठहराते हुए बाढ़ जेहाद से जोड़ा।फिर उनका ओबीसी प्रमाण पत्र फर्जी बताया,लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं की।अंततः उन्हें असम में स्थित उनके एक निजी स्कूल में परीक्षार्थियों को परीक्षा में मदद के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।पत्रकारों ने जब मुख्यमंत्री से पूछा तो उन्होंने कहा कि हक को तो लंबे समय तक जेल में रहना पड़ेगा।मुख्यमंत्री कोई जज नहीं कि फैसला सुनाए।पर वे ऐसा ही कर रहे हैं।हक पर जो मामले दर्ज किए गए थे,उन्हें उन मामलों में जमानत मिल चुकी है।
अब एक पत्रकार दिलवार हुसैन मजुमदार को गिरफ्तार किया गया।दिलवार एपेक्स बैंक के घोटाले के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज करने गया था।जब बैंक के प्रबंध निदेशक डी सैकिया से उनका पक्ष जानना चाहा तो सैकिया ने दिलवार को ऊपर बुलाया।लेकिन बाद में पुलिस ने दिलवार को गिरफ्तार कर लिया।आरोप लगाया गया कि उसे एससी-एसटी कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।पर दूसरे ही दिन इस मामले में जमानत मिली तो पुलिस ने बैंक के कागजात चोरी के प्रयास के और एक मामले में दिलवार को गिरफ्तार कर लिया।इस मामले में भी दूसरे दिन दिलवार को जमानत मिल गयी।इससे साफ हो गया कि दिलवार को फर्जी मामले में फंसाया गया है।
दिलवार एक न्यूज पोर्टल द क्रास करंट में काम करता है।इस पोर्टल में मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के खिलाफ समाचार प्रकाशित होते रहते हैं।आशंका है कि इसीलिए यह कार्रवाई की गयी।यह पोर्टल अखिल गोगोई की पार्टी राइजर दल के नेता से जुड़ा है।
इन दो घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री डा.हिमंत विश्व शर्मा के विवादास्पद बयान सामने आने लगे।दिल्ली में एक टीवी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में डा.शर्मा ने कहा कि दिलवार को मेरे खिलाफ लिखने के लिए गिरफ्तार नहीं किया गया है।वह बैंक में धमकी देकर कर्ज लेना चाहता था।इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया है।इससे पहले वे दिलवार की गिफ्तारी पर कह चुके हैं कि दिलवार पत्रकार नहीं है।वह तो वकील,व्यापारी और डंपर मालिक है।हमारी सरकार पोर्टल के पत्रकारों को स्वीकृति प्रदान नहीं करती।मुख्यमंत्री यहीं नहीं थमे।उन्होंने अब कहना शुरु किया कि महबूबल हक और दिलवार जैसों को खत्म करना ही मेरा काम है।मुख्यमंत्री के इस तरह के बयानों से स्पष्ट हो जाता है कि वे कानून के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं।
राज्य में राभा हासोंग स्वशासी परिषद के चुनाव 2 अप्रैल को हैं।इसका प्रचार करते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि सुअर ज्यादा पालिए ताकि वे आसपास आ ही नहीं सके।इससे स्पष्ट होता है कि वे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कितना विष वमन कर रहे हैं।उनके मंत्री अशोक सिंघल और पीयूष हजारिका भी इस मामले में उनसे दो कदम आगे चल रहे हैं।जब गुजरात में दंगे हुए थे तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से राजधर्म का पालन करने को कहा था।अब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं।उन्हें भी भाजपा नेता तथा मुख्यमंत्री डा.हिमंत विश्व शर्मा को राजधर्म का पालन करने को कहना चाहिए।लेकिन उम्मीद नहीं कि वे कहेंगे।
भाजपा में तो होड़ मची है कि कौन कितना बड़ा हिंदू नेता है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पछाड़ने की दौड़ में हिमंत चल रहे हैं।इसके लिए वे कानून को ही अपने पैरों से रौंद रहे हैं।उन्हें लगता है कि लाभार्थियों के बल पर वे 2026 का चुनाव जीत जाएंगे।पर उन्हें यह भी समझ लेना चाहिए कि जनता बहुत सजग है।वह सत्ता से उखाड़ भी फेंक सकती है।एआईयूडीएफ के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल का उदाहरण सामने है।मुस्लिम समुदाय के लोगों को जब स्पष्ट पता चल गया कि अजमल और हिमंत में सांठगांठ है तो धुबड़ी संसदीय सीट की जनता ने लोकसभा चुनाव में उन्हें करारी हार दिखा दी,वहीं हिमंत विश्व और उनके मंत्रियों की जी-तोड़ कोशिश के बाद भी गौरव गोगोई जोरहाट से जीत गए।इससे हिमंत विश्व शर्मा को सीख लेनी चाहिए।संविधान के नाम पर शपथ लेकर इस तरह नहीं करना चाहिए।